मातृ-शिशु एवं बाल पोषण (एम.आई.वाई.सी.एन.) कार्यक्रम

(Maternal Infant and Young Child Nutrition (MIYCN) Programme)

प्रस्तावना:

मातृ-शिशु एवं बाल पोषण (एम.आई.वाई.सी.एन.) एक सामुदायिक आधारित कार्यक्रम हैं, जो कि गर्भवती महिला के गर्भ धारण से लेकर बच्चें के दो वर्ष की आयु तक होता हैं। इस कार्यक्रम को अवसर की खिड़की या 1000 दिवस के नाम से भी जाना जाता हैं, क्योंकि इसमे कुल 1000 दिवस को सम्मिलित किया जाता हैं, जैसेः

1000 दिवस - महिला के गर्भ धारण से बच्चें के दो वर्ष की आयु तक।
270 दिवस 730 दिवस
महिला के गर्भ धारण से 9 माह तक बच्चें के जन्म से दो वर्ष की आयु तक

इस कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिला की स्वास्थ्य जांच, महिला व बच्चें का नियमित वजन, संतुलित आहार, संपूरक आहार व समयानुसार उपयुक्त आहार का आवश्यक परामर्श प्रदान किया जाता हैं।

स्वछता जल और सामुदायिक स्वास्थ्य परियोजना (स्वच्छ परियोजना) एवं यूनिसेफ के संयुक्त तत्वाधानो से मातृ-शिशु एवं बाल पोषण कार्यक्रम राजस्थान के उदयपुर और सिरोही जिले के मुख्य जनजातीय प्रखंडो- लसाडिया, झाड़ोल/ फलासिया, कोटरा/ गोगुन्दा, सलुम्बर/झलारा, सराडा/सेमारी, खेरवाड़ा/ ऋषभदेव व आबूरोड (सिरोही) में इस कार्यक्रम का संचालन बाहुल्य चयनित जनजातिय स्वास्थ्य सहयोगिनी/ स्वच्छ कार्यकर्ताओ के माध्यम से चलाया जा रहा हैं।

कार्यक्रम का उद्देश्य:

  • माँ एवं शिशु के स्वास्थ्य को सुधारना।
  • गर्भवती महिला को गर्भावस्था के दौरान पोषण एवं आहर सम्बंधित परामर्श प्रदान करना।
  • गर्भावास्था के दौरान संतुलित आहार (तिरंगा/ ट्रैफिक सिग्नल लाइट के रंग या गुजरती थाली), दो घंटे का आराम, आयोडीन नमक के सेवन के परामर्श को बढ़ाना।
  • गर्भावस्था के दौरान समयानुसार चार जांचे, कैल्शियम व आयरन की गोलियों के सेवन को बढ़ावा देना।
  • माँ का प्रथम दूध (कोलेस्ट्रम/ खीस), छ: माह तक केवल स्तनपान को बढ़ावा देना।
  • बच्चें के लिए संपूरक/ ऊपरी आहारके महत्व को बढ़ाना।
  • समयानुसार बच्चें के सम्पूर्ण टिक्काकरण को बढ़ावा देना।
  • कामकाजी महिलाओ में स्तनपान को बढ़ावा देना, साथ ही डिब्बाबंद दूध के उपयोग को बाधित करना।
  • कार्यक्रम से जुड़े सभी सदस्यों को समय-समय पर कार्यक्रम से सम्बंधित मुद्दों पर प्रशिक्षण प्रदान करना।

कार्यक्रम की प्रक्रिया:

स्वच्छ विभाग के तहत सभी जनजातीय क्षेत्रो में स्वच्छकर्मी नियुक्त हैं, जिनके द्वारा ग्राम में स्वास्थ्य सहयोगिनीयो के द्वारा गर्भवती महिलाओं का पता लगाना के साथ ही अपने मातृ-शिशु एवं बाल पोषण कार्यक्रम के प्रपत्रों में उनका पंजीकरण कराया जाता हैं।जिसे एम.सी.एच.एन (MCHN) दिवस पर आंगनवाडी केन्द्रों व उपस्वास्थ्य केन्द्रों पर ए.एन.एम के द्वारा महिला का प्रथम तिमाही या 12 सप्ताह में पंजीकरण कराया जाता हैं।

पंजीकरण (ए.एन.एम के द्वारा प्रथम तिमाही या 12 सप्ताह के भीतर करवाना)

ममता कार्ड (ए.एन.एम के द्वारा महिला का मातृ-शिशु सुरक्षा कार्डजारी करवाना)

टीकाकरण (ए.एन.एमके द्वारा टीकाकरण करवाना)

कार्ड के आधार पर महिला की प्रथम तिमाही से तृतीय तिमाही तक विभिन्न जांचे व परामर्श दिए जाते है, जो किनिम्न प्रकारसेहैं:

प्रथम तिमाही:
  • स्वास्थ्य जाँच - वजन, हीमोग्लोबिन, पेशाब की जाँच फोलिक एसिड की गोलियों (केवल 12 सप्ताह के दौरान) के सेवन को बताना।
  • परामर्श सेवाए - संतुलित आहार(तिरंगा/ ट्रैफिक सिग्नल लाइट के रंग या गुजरती थाली) के आधार पर परामर्श, आराम, आयोडीन नमक के उपयोग व अन्य सम्बंधित समयानुसार परामर्श देना।
दूसरी तिमाही:
  • स्वास्थ्य जाँच - वजन, हीमोग्लोबिन, पेशाब की जाँच, कृमिनाशक एल्बेनडाजोल की केवल एक गोली का सेवन, आयरन, फोलिक एसिड व कैल्शियम की गोली के सेवन को बताना।
  • परामर्श सेवाए - संतुलित आहार (तिरंगा/ ट्रैफिक सिग्नल लाइट के रंग या गुजरती थाली) के आधार पर परामर्श, आराम, आयोडीन नमक के उपयोग व अन्य सम्बंधित समयानुसार परामर्श देना।
तीसरी तिमाही:
  • स्वास्थ्य जाँच - वजन, हीमोग्लोबिन, पेशाब की जाँच, आयरन, फोलिक एसिड व कैल्शियम की गोली के सेवन को बताना।
  • परामर्श सेवाए - संतुलित आहार( तिरंगा/ ट्रैफिक सिग्नल लाइट के रंग या गुजरती थाली) के आधार पर परामर्श, आराम, आयोडीन नमक के उपयोग व अन्य सम्बंधित समयानुसार परामर्श देना। साथ हीप्रसव अस्पताल में करना, बच्चें को माँ का प्रथम दूध प्रसव के एक घंटे के अन्दर पिलाने के लिए भी महिला को परामर्श किया जाता हैं।
मातृ-शिशु एवं बल पोषण हेतु समुदाय आधारित कार्यक्रम के महत्वपूर्ण ”अवसर की खिड़की” 1000 दिवस के मुख्य बिंदुनिम्नानुसारहैं।
  • गर्भवती व स्तनपान करने वाली महिलाओं का पोषण व आहार।
  • गर्भवती महिला व बच्चें के जन्म से ही समयानुसार सम्पूर्ण टीकाकरण करवाया जाना चाहिये।
  • संतुलित आहार(तिरंगा आहार/ ट्रैफिक सिग्नल लाइट रंग या गुजरती थाली), आराम व अन्य समयानुसार सम्बंधित परामर्श देना| आहार में आयोडीन युक्त नमक का ही प्रयोग करने का परामर्श देना।
  • गर्भावस्था के दौरान महिला का कुल 10-12 किलो वजन बढ़ना चाहिये।
  • प्रसव पूर्व तैयारी व सामुदायिक स्तनपान का समर्थन को जुटाना।
  • प्रसव के तुरंत बाद या एक घंटे के अन्तराल पर बच्चें को माँ का प्रथम दूध/ खीस पिलाया जाना चाहिये।
  • छ: माह तक बच्चें को केवल माँ का दूध ही पिलना चाहिये, पानी भी नहीं पिलाया जाना चाहिये।
  • माँ के दूध का बनना व शिशु के द्वारा ग्रहण करने को सुनिश्चित करना।
  • शिशु की स्तन से लगाने की स्थिति (पोजिशनिंग) के बारे में परामर्श करना।
  • कम वजन वाले जन्मे शिशुओ के स्तनपान को सुनिश्चित करना।
  • महिला को परामर्श करना जब उसका शिशु स्तनपान से इंकार करे या रोये या पपर्याप्त दूध का न बनना।
  • छ: माह पूर्ण होने पर सातवें माह के प्रारम्भ से बच्चे को माँ के दूध के साथ-साथ घर में बने ऊपरी/संपूरक आहार को खिलाना प्रारम्भ सुनिश्चित करना।
  • माताओं को परामर्श करना की शिशु एवं छोटे बच्चों के लिए सर्वोत्तम आहार की पूर्ति के क्या लाभ हैं।
  • कामकाजी महिलाओ में स्तनपान को बढ़ावा देंना।
  • महिलाओं को स्वछता सम्बंधित शिक्षा व परामर्श देना।
  • वृद्धि माप के अनुसार कदम उठाना| वृद्धि चार्ट: डब्लू.एच.ओ शिशु वृद्धि मानक के उपयोग को सुनिश्चित करना।
  • विषयों के साथ स्वास्थ्यकर्मी को अपने-अपने क्षेत्र का नजरी नक्शा बनाने के बारे में जानकारी दी गई हैं, जिसका उपयोग करके वह गर्भवती महिलाओं व बच्चोँ को अपनी सेवाओं को आसानी व समयानुसार प्रदान कर सके।
मासिक प्रतिवेदन: MIYCN के कार्य का मासिक प्रतिवेदन विभिन्न स्तर से होता हुआ जिला स्तर पर जाता है, जो कि निम्न हैं

स्वास्थ्य सहयोगिनी/ स्वच्छकर्मी अपने क्षेत्र के सभी गर्भवती/ धात्री महिलाओं व बच्चोँ की मासिक सुचना 1000 दिवस रजिस्टर/कार्ड में भरकर ब्लॉक समन्वयको को उपलब्ध करवाते हैं।

ब्लॉक समन्वयको के द्वारा जिला स्तर पर विभागीय कार्यक्रम प्रभारी (ओ.आई.सी ) को मासिक प्रतिवेदन उपलब्ध करवाते हैं, साथ ही ब्लॉक समन्वयको के द्वारा स्वच्छ यूनिसेफ के ऑनलाइन पोर्टल- swachunicef.org पर भी मासिक गर्भवती महिला व बच्चे की प्रपत्रानुसार जानकारी भरी जा रही हैं।

ओ.आई.सी के द्वारा मासिक प्रतिवेदन को जिला परियोजना अधिकारों को प्रत्येक माह के प्रथम सप्ताह में उपलब्ध कराई जाति हैं।

स्वच्छ यूनिसेफ, उदयपुर का MIYCN कार्यक्रम का मासिक प्रतिवेदन प्रवाह चार्ट

कार्यक्रम उपलब्धिया:

स्वछता जल और सामुदायिक स्वास्थ्य परियोजना (स्वच्छ परियोजना) एवं यूनिसेफ के संयुक्त प्रयासों से इस कार्यक्रम को सफल बनाने के लिए उदयपुर और सिरोही जिलो में स्वच्छटीम की तरफ से अन्ततः प्रयास किये जा रहे हैं| जिसके तहत कुछ कार्य उपलब्धिया निम्न हैं-

  • उदयपुर और सिरोही जिले के कुल 1514 गांवों में इस कार्यक्रम पर 1427 स्वच्छकर्मी कार्यरत हैं।
  • कार्यक्रम से सम्बंधित कई बिन्दुओ जैसे तीनदिवसीयMIYCNकार्यक्रम प्रशिक्षणव एकदिवसीयSBCC प्रशिक्षण, डाटा एंट्री प्रशिक्षणतथाMIYCNकार्यक्रम रिफ्रेशरप्रशिक्षण भीदिया जा चुका हैं।
  • इस कार्यक्रम के तहत कुल 14773 गर्भवती महिलाओं से सीधा सम्पर्क किया गया, जिन्हें संस्थागत प्रसव, प्रसव पूर्व देखभाल, माँ का प्रथम दूध आदि के बारे में परामर्श स्वच्छकर्मियों द्वारा प्रदान किया गया।
  • इस कार्यक्रम के तहत 2017 तक कुल 4652 प्रसव को रजिस्टर करवाया गया जिसमें से संस्थागत प्रसव 4174 रजिस्टर रजिस्टर हुए और घर पर प्रसव 478 रजिस्टर हुए।
  • 2017 की रिपोर्ट के आधार पर कुल 47.76% (2222) बालिकाओ का जन्म हुआ और 52.24% (2430) बालकों का जन्म रजिस्टर किया गया।
  • 2017 में इस कार्यक्रम के तहत कुल 1279 4th ANC रिपोर्ट की गई।
  • 2017 में इस कार्यक्रम के तहत घरो के स्तर पर आयोडीन नमक की उपभोगता 5382 घरों में दर्ज की गई।
  • 2017 में इस कार्यक्रम के द्वारा कुल 3920 महिलाओ के द्वारा 6 माह तक केवल माँ का दूध अपने बच्चो को दिया।

इस प्रकार स्वच्छ यूनिसेफ की टीम के द्वारा तहत प्रयास इस कार्यक्रम को जन-जन तक पहुचाने के लिए काप्रयासकियागयाहै।

SWACH-UNICEF कार्यक्रम सम्बन्धित चार्ट :-

निदेशक

प्रोजेक्ट मैनेजर प्रबन्ध

यूनिसेफ, राजस्थान

जिला परियोजना अधिकारी

यूनिसेफ कार्यक्रम समन्वयक

जिला(ओ.आई.सी.)प्रभारी

ब्लाक नोडल प्रभारी- ब्लाक समन्वयक

ब्लाक समन्वयक / मुख्य ब्लाक समन्वयक

स्वास्थ्य सहयोगिनी / स्वास्थ्य कार्यकर्ता / स्वच्छकर्मी / एस.के.

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